परम पूज्य सद्गुरुदेव स्वामी रंगरामानुजाचार्य जी महाराज
परम पूज्य सद्गुरुदेव स्वामी रंगरामानुजाचार्य जी महाराज एक महान श्रीवैष्णव आचार्य, वेदांताचार्य एवं धर्मगुरु थे, जिन्होंने अपने जीवन को सनातन धर्म, श्रीवैष्णव परंपरा और वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया। वे परम तपस्वी, विद्वान और अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा से युक्त संत थे, जिनका जीवन श्रीवैष्णव धर्म की उन्नति और मानवता की सेवा के लिए समर्पित था। वे स्वामी श्रीश्रीधराचार्य जी महाराज के पूज्य गुरुदेव थे और उन्हें वेदांत और धर्मशास्त्रों का गूढ़ ज्ञान प्रदान किया।
गूढ़ शास्त्रीय शिक्षा और विद्वत्ता
स्वामी रंगरामानुजाचार्य जी महाराज ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से आचार्य की उपाधि प्राप्त की और वेदों, शास्त्रों और दर्शनों में उच्चतम शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने विशेष रूप से व्याकरण, न्याय, मीमांसा और वेदांत में गहन अध्ययन किया और सनातन धर्म के गूढ़ रहस्यों को समझाया। उनकी विद्वत्ता और आध्यात्मिक गहराई के कारण वे एक श्रेष्ठ तत्त्वदर्शी संत के रूप में पूजे जाते थे।
वैदिक ज्ञान और श्रीवैष्णव परंपरा का प्रचार
स्वामी जी ने श्रीवैष्णव परंपरा और श्रीरामानुजाचार्य जी के सिद्धांतों को संपूर्ण समाज तक पहुँचाने का कार्य किया। वेदांत, उपनिषद और भगवद गीता के माध्यम से उन्होंने हजारों शिष्यों को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का मार्ग दिखाया। वे श्रीवैष्णव परंपरा के महान आचार्यों में से एक थे, जिन्होंने सहज और सरल भाषा में वैदिक ज्ञान का प्रचार किया, ताकि हर व्यक्ति धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझ सके।
सनातन धर्म और समाज सेवा में योगदान
स्वामी रंगरामानुजाचार्य जी महाराज ने सनातन धर्म, गौसेवा, अन्नदान, शिक्षा और आध्यात्मिक उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उनके मार्गदर्शन में अनेक संतों और विद्वानों ने शिक्षा प्राप्त की और धर्म का प्रचार किया। वे एक महान समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने भक्ति के साथ-साथ सेवा को भी परम धर्म बताया। उनके आशीर्वाद से उनके शिष्य डॉ. स्वामी श्रीश्रीधराचार्य जी महाराज आज उनके विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं और श्रीवैष्णव धर्म का प्रचार कर रहे हैं।
शिष्य परंपरा और आध्यात्मिक धरोहर
स्वामी रंगरामानुजाचार्य जी महाराज की शिष्य परंपरा में असंख्य साधु-संत और भक्तगण हैं, जिन्होंने उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में धर्म और सेवा का संचार किया। उनके महान शिष्य डॉ. स्वामी श्रीश्रीधराचार्य जी महाराज उनके सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय श्री रंगरामानुज पीठ के माध्यम से धर्म, योग, ध्यान और सेवा का प्रचार कर रहे हैं। उनके द्वारा स्थापित आध्यात्मिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देती रहेगी।